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राजेश कुमार व्यास को केंद्रीय साहित्य अकादमी का सर्वोच्च सम्मान

राजस्थान के डाॅ. राजेश कुमार व्यास को इस वर्ष केन्द्रीय साहित्य अकादमी का सर्वोच्च पुरस्कार। कविता संग्रह ‘कविता देवै दीठ’ पर मिलेगा डाॅ. व्यास को साहित्य अकादमी का सर्वोच्च सम्मान।


नई दिल्ली। जाने-माने संस्कृतिकर्मी, कवि, आलोचक एवं जनसंपर्क कर्मी डाॅ. राजेश कुमार व्यास को इस वर्ष का केन्द्रीय साहित्य अकादमी का सर्वोच्च पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की गयी है। डाॅ. व्यास को केन्द्रीय साहित्य अकादमी द्वारा भारतीय भाषाओं की श्रेष्ठ कृतियों को दिया जाने वाला साहित्य अकादमी पुरस्कार उनकी काव्यकृति ‘कविता देवै दीठ’ पर प्रदान किया जायेगा। व्यास राजस्थान सूचना सेवा में उपनिदेशक हैं।

नई दिल्ली में केन्द्रीय साहित्य अकादमी की पुरस्कार चयन समिति की बुधवार को हुई बैठक में साहित्य अकादमी के सर्वोच्च पुरस्कारों की घोषणा की गयी। बैठक में राजस्थान के डाॅ. राजेश कुमार व्यास को राजस्थानी में कविता की उनकी विरल कृति ‘कविता देवै दीठ’ पर साहित्य अकादमी ने यह पुरस्कार प्रदान करने का निर्णय किया। डाॅ. व्यास को इसके तहत आगामी 29 जनवरी 2019 को नयी दिल्ली में आयोजित साहित्योत्सव में  ताम्र फलक और एक लाख रूपये की नकद राषि प्रदान कर पुरस्कृत किया जायेगा। साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 1954 से प्रत्येक वर्ष भारतीय भाषाओं की श्रेष्ठ कृतियों को केन्द्रीय साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित किया जाता है। डाॅ व्यास की पुरस्कार के लिये घोषित काव्य कृति ‘कविता देवै दीठ’ इस मायने में विरल है कि इसमें राजस्थानी भाषा की आंचलिक मिठास के साथ ही शब्द-षब्द ओज में कला और संस्कृति के अनूठे दृष्य चिचराम हैं। राजस्थानी भाषा में कविता की नई जमीन तैयार करने वाली यह कृति डाॅ. व्यास की पैनी काव्य दृष्टि, संवेदना और परख की गहरी समझ में राजस्थानी शब्दों की अनूठी लय लिये है। कविता में सूक्ष्म बिम्ब, प्रतीकों के जरिए थोड़े में बहुत कुछ कहती इस काव्यकृति में संस्कृति और समय की अनूठी व्यंजनाएं हैं। उनकी कविताओं में दार्शनिक  बोध है तो जीवन से जुड़ी अनुभूतियों की दृष्य लय है।

‘कविता देवै दीठ’ को इससे पहले राजस्थानी भाषा, साहित्य और संस्कृति अकादमी के ‘गणेशी लाल  व्यास उस्ताद ‘पद्य’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। केन्द्रीय साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 1997 में राजस्थानी के लिये ‘यात्रा फैलोषिप’ प्राप्त व्यास की साहित्य की विभिन्न विधाओं में अब तक 21 कृतियां प्रकाषित हो चुकी हैं। इनमें सर्वथा नवीन भाव-भूमि लिये राजस्थानी के तीन कविता संग्रह ‘जी रैयो मिनख’, ‘कविता देवै दीठ’ और ‘दीठ रै पार’ अत्यधिक चर्चित रहे हैं।  राजस्थानी भाषा की विषिष्ट कहानियों की कृति ‘राजस्थानी की कालजयी कहानियां’ का भी उन्होंने देश के ख्यातिलब्ध कथाकार यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’ के साथ कोई 25 वर्ष पहले सम्पादन किया था। डाॅ. व्यास ने दूरदर्षन से प्रसारित राजस्थानी साहित्यिक कार्यक्रम ‘मरूधरा’ का भी कोई एक दषक से अधिक समय तक संयोजन-संचालन किया है। राजस्थानी में डायरी, यात्रा वृतान्त और संस्मरणों के साथ ही आलोचना पर भी उन्होंने विषेष कार्य किया है। दूरदर्षन ने राजस्थान की संस्कृति और स्थानों पर केन्द्रित उनके द्वारा लिखे यात्रा वृतान्त धारावाहिक ‘डेजर्ट काॅलिंग’ का निर्माण कर उसे विभिन्न चैनलों से प्रसारित किया है। नेषनल बुक ट्रस्ट, इण्डिया से प्रकाषित उनके दो यात्रा वृतान्त ‘कष्मीर से कन्याकुमारी’ और ‘नर्मदे हर’, संगीत सर्जना की ‘सुर जो सजे’ तथा वाग्देवी से प्रकाषित संगीत, नृत्य, नाट्य आदि कलाओं पर एकाग्र ‘रंग नाद’, बाल साहित्य की दो कृतियां, राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी से प्रकाषित आलोचना की ‘भारतीय कला’ और ‘सांस्कृति राजस्थान’ आदि उनकी प्रमुख कृतियां हैं।

डाॅ. व्यास को भारत सरकार का प्रतिष्ठित ‘राहुल सांकृत्यायन’, राजस्थान सरकार द्वारा ‘उत्कृष्ट लेखन’, जनसम्पर्क पत्रकारिता का प्रतिष्ठित ‘माणक अलंकरण’, अन्तर्रराष्ट्रीय धु्रवपद धाम सोसायटी का ‘विषिष्ट कला लेखन’, श्रीगोपाल पुरोहित स्मृति सांस्कृतिक लेखन पुरस्कार सहित विभिन्न अन्य पुरस्कारों से भी निरंतर सम्मानित किया जाता रहा है। राजस्थानी साहित्य, और कलाओं के साथ ही पत्रकारिता, पर्यटन और संस्कृति पर देषभर के उच्च षिक्षण संस्थानों, साहित्य अकादेमी, संगीत नाटक अकादेमी, ललित कला अकादेमी में उनके व्याख्यानों से उनकी विषेष पहचान है। केन्द्रीय ललित कला अकादमी की पत्रिका ‘समकालीन कला’ के एक अंक के वह अतिथि सम्पादक रहे हैं तो राजस्थान ललित कला अकादेमी की पत्रिका ‘आकृति’ के ‘लोक आलोक’ और ‘कलाओं के अन्तःसम्बन्धों पर एकाग्र’ विषेष अंको का भी उन्होंने सम्पादन किया है।

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