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बिहार के छात्रों के साथ बिहार सरकार का दोहरा व्यवहार

पटना 11 जुलाई 2019 (एएनएस) । किसी समाज की उनित का आधार उसकी शिक्षा प्रणाली होती है। शिक्षा से ही मानव का आर्थिक, सामाजिक एवं मानसिक उत्थान संभव है। इन्हीं भावनाओ को घ्यान में रखते हुऐ शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए समय समय पर परिवर्तन किऐ जाते रहें है। इन परिवर्तनों और फैसलों का सीधा प्रभाव हमारे समाज पर पड़ता है।

इसी प्रकार का एक फैसला हाल ही में बिहार सरकार ने लिया है। जिसकी वजह से बिहार स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के द्वारा वित्त्ीय सहायता प्राप्त कर देश भर के विभिन्न शैक्षिणिक संस्थानों/विश्वविद्यालयों में अध्ययन की इच्छा रखने वाले छात्रों की भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। अब ये छात्र केवल उन्हीं संस्थानों में प्रवेश पा सकेंगे जो कि नेक (NAAC) या एन बी ए (NBA) / एन आई आर एफ (NRIF) से अक्क्रेडिटेशन प्राप्त कर चुके हैं। ज्ञात हो कि किसी भी संस्था को नैक से अक्क्रेडिटेशन संस्थान की स्थापना 5 वर्ष पूर्ण या दो बैच पास आउट करने के उपरांत ही आवेदन करने का प्रावद्यान है। किन्तु ज्यादातर संस्थान छठे वर्ष ही आवेदन कर पाते हैं क्योंकि बी-टेक का पाठयक्रम 4 वर्ष का है।

एक तरफ तो सरकार शिक्षा के प्रचार प्रसार पर जोर देती है, एवं अन्य शिक्षण संस्थानों के साथ इस प्रकार का भेदभाव कर उनका मनोबल को गिराती है। दूसरी ओर उन छात्रों को अपने मर्जी से शिक्षण संस्थानों का चयन करने की आजादी पर भी रोक लगाती है। इस निर्णय से छात्रों में निराशा व संशय का माहौल पैदा नहीं होगा?

– क्या सरकार यह बताना चाहती है कि कोई भी नया संस्थान तब तक अच्छी शिक्षा नहीं दे रहा जब तक वह नैक (NAAC) या एन बी ए (NBA) से अक्क्रेडिटेशन प्राप्त न कर ले?

– क्या कोई भी सरकार यह फैसला कर सकती है कि आप इन संस्थाओं में अध्ययन करें तथा अन्य संस्थाओं में अध्ययन न करें?

– इस प्रकार के फैसले में क्या सभी छात्रों का हित निहित है?

– कोई भी शिक्षण संस्थान जोकि प्रतिवर्ष चार हजार से पांच हजार छात्रों को प्रवेश देता है और वह बिहार क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 200-400 बच्चों को प्रवेश देता है तो क्या ऐसे संस्थानों को संदिग्ध द्ष्टि से देखा जाना चाहिए ?

– क्या यह नये संस्थान के सम्मान और साख पर कुठाराघात नहीं है ?

इन सब तथ्यों का आकलन करें तो एक ही बात समक्ष मे आती है कि या तो यह फैसला राजनीति से प्रेरित है या फिर पुराने एवं प्रभावशाली शिक्षण संस्थानों के दबाव में आकर लिया गया है।

एएनएस समाचार / रंजीत सिंह

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