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‘ज़िन्दगीनामा’ की कृष्णा का निधन

नई दिल्ली (एएनएस)। लंबे समय से बीमार चल रही वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णा सोबती का आज एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे करीब 94 वर्ष की थीं। उन्हें कई सम्मानों से सम्मानित किया गया था। उन्हें बेलाग कथात्मक अभिव्यक्ति और सौष्ठवपूर्ण रचनात्मकता के लिए खास तौन पर जाना जाता है। सोबती का जन्म अविभाजित भारत के गुजरात में 18 फरवरी 1925 को हुआ था। भारत-पाक बंटवारे के वक्त वो दिल्ली में आकर रहने लगीं और यहीं की होकर रह गईं।
उनकी साहित्यिक रचनाओं में डार से बिछुड़ी, मित्रो मरजानी, यारों के यार, बादलों के घेरे, तिन पहाड़, ऐ लड़की, जैनी मेहरबान सिंह , सूरजमुखी अँधेरे के, ज़िन्दगी़नामा , दिलोदानिश, समय सरगम, गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान , हम हशमत, सोबती एक सोहबत, शब्दों के आलोक में, सोबती वैद संवाद, मुक्तिबोध : एक व्यक्तित्व सही की तलाश में, लेखक का जनतंत्र, मार्फ़त दिल्ली, यात्रा-आख्यान, बुद्ध का कमण्डल : लद्दाख़ आदि प्रमुख हैं।
कृष्णा सोबती को वर्ष 1980 में ज़िन्दगीनामा’ की रचना के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार, वर्ष 1981 में शिरोमणी पुरस्कार, 1982 में हिन्दी अकादमी अवार्ड, 1999 में कछा चुडामणी पुरस्कार, 1996 में साहित्य अकादमी फेलोशिप, वर्ष 2000-2001 के लिए शलाका पुरस्कार और वर्ष 2017 में भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
एएनएस समाचार /विद्या नन्द मिश्रा

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