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सत्य का शोध ही विपश्यना: वल्लभ भंसाली

जयपुर। सत्य की शोध ही विपश्यना है। खुद को देखना ही विपश्यना है। विपश्यना वैज्ञानिक मार्ग है और इसका उद्देश्य जीवन में सुख और शांति लाना है। ये विचार प्रसिद्ध चिंतक एवम विपश्यना साधक वल्लभ भंसाली ने रविवार को माहेश्वरी समाज की ओर से माहेश्वरी पब्लिक स्कूल, जवाहर नगर के तक्षशिला ऑडिटोरियम में सद्संस्कार शृंखला में आयोजित अपने सुख की चाबी अपने पास विषय पर रखे।

कार्यक्रम में उन्होंने संस्कार के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की संस्कार का अर्थ है आदत यानी व्यक्ति में जो संस्कार होते हैं, वह व्यक्त होकर ही रहते हैं। आदत भी इसी का रूप है। इस अवसर पर भंसाली ने श्रोताओं को विपश्यना पद्धति का व्यावहारिक ज्ञान भी कराया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में माहेश्वरी समाज, जयपुर के अध्यक्ष प्रदीप बाहेती व महामंत्री गोपाल लाल मालपानी संयोजक दिनेश मालपानी ने वल्लभ भंसाली का स्वागत किया।

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