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प्रसिद्ध वैज्ञानिक जे.सी बोस के नाम से जाना जायेगा वाईएमसीए


फरीदाबाद, 11 सितम्बर (एएनएस) ।  अपनी स्थापना के 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहा वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद अब से जे.सी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए फरीदाबाद के नाम से जाना जायेगा। हरियाणा विधानसभा के चल रहे मॉनसून सत्र में वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, 2018 पास हो गया है। दरअसल विश्वविद्यालय के नाम के बदलाव की घोषणा प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 26 अक्तूबर, 2017 को विश्वविद्यालय में आयोजित विज्ञान सम्मेलन में की थी।

महान विज्ञान थे जे.सी. बोस
भारतीय वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे, जिन्होंने रेडियो और माइक्रोवेव ऑप्टिक्स के अविष्कार तथा पेड़−पौधों में जीवन सिद्धांत के प्रतिपादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भौतिक वैज्ञानिक होने के साथ-साथ वो जीव वैज्ञानिक, वनस्पति वैज्ञानिक, पुरातत्वविद और लेखक भी थे। उन्होंने ही पहली बार दुनिया को बताया कि पेड़-पौधों को भी अन्य सजीव प्राणियों की तरह दर्द होता है। जे.सी. बोस ऐसे समय पर कार्य कर रहे थे जब देश में विज्ञान शोध कार्य लगभग नहीं के बराबर थे। ऐसी परिस्थितियों में भी बहुमुखी प्रतिभा के धनी बोस ने विज्ञान के क्षेत्र में मौलिक योगदान दिया। जे.सी. बोस के अनुसांधनों और कार्यों का उपयोग आने वाले समय में किया गया। आज का रेडियो, टेलिविजन, भुतलीय संचार रिमोट सेन्सिग, रडार, माइक्रोवेव अवन और इंटरनेट के लिए उनके कृतज्ञ हैं। वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे, जिन्होंने अमेरीकन पेटेंट प्राप्त किया। 30 नवंबर 1858 को पूर्वी बंगाल अब बांगलादेश में जन्में और भारत की आजादी से पहले भारत वासियों को गौरशाली कर देने वाली कई महत्वपूर्ण खोज दे गए और 23 नवम्बर, 1937 को अमर हो गए।

डिप्लोमा काॅलेज से विश्वविद्यालय तक का सफर

वर्ष 1969 में इंडो-जर्मन परियोजना के तहत शुरू हुए वाईएमसीए इंजीनियरिंग संस्थान को शुरू करने का उद्देश्य जर्मनी की तर्ज पर भारत को औद्योगिक रूप से सक्षम बनाने के लिए तकनीकी शिक्षा का प्रसार करना था। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-2 (दिल्ली-मथुरा) पर लगभग 20 एकड़ पर स्थित वाईएमसीए विश्वविद्यालय परिसर क्षेत्रफल की दृष्टि से हरियाणा का सबसे छोटा राजकीय विश्वविद्यालय है। वर्ष 1996 तक यह संस्थान भारत में यंगमैन क्रिश्चन एसोसिएशन (वाईएमसीए) के राष्ट्रीय परिषद् तथा हरियाणा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जाता था, जिसकी स्थापना में जर्मनी की केन्द्रीय एजेंसियां का भी सहयोग रहा।
वर्ष 1997 में संस्थान डिप्लोमा से डिग्री काॅलेज के रूप में अपग्रेड हुआ और 2002 में पीजी पाठ्यक्रम शुरू किये गये। वर्ष 2007 में इस संस्थान को स्वायता हासिल हुई और दिसम्बर, 2009 में हरियाणा राज्य विधायी अधिनियम संख्या 21 के तहत विश्वविद्यालय का दर्जा हुआ। आज इस विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के अंतर्गत 2एफ व 12बी मान्यता हासिल है। राष्ट्रीय मानक एजेंसी नैक द्वारा विश्वविद्यालय को ‘ए’ ग्रेड मान्यता दी गई है और विश्वविद्यालय के लगभग सभी तकनीकी पाठ्यक्रम एनबीए से मान्यता प्राप्त है, जो विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता का परिचायक है।

72 विद्यार्थियों से शुरू हुआ था सफर

वाईएमसीए संस्थान की शुरूआत मैकेनिकल, इलेक्ट्राॅनिक्स और इलेक्ट्रिकल विषयों में विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रमों से हुई थी, जिसमें 72 सीटें थी। हालांकि बाद में डिप्लोमा सीटों की संख्या बढ़ती गई। आज विश्वविद्यालय में 13 अंडर-ग्रेजुएट व 16 पोस्ट ग्रेजुएट विषयों में लगभग 3500 विद्यार्थी पढ़ रहे है और अगले दो वर्षाें में यह संख्या 5 हजार तक होना अपेक्षित है। विश्वविद्यालय द्वारा कम्प्यूटर साइंस, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल तथा सिविल सहित सात विषयों में चार वर्षीय बीटेक कोर्स के अलावा फिजिक्स, कैमिस्ट्री व मैथ में बीएससी आॅनर्स, बीबीए, बीसीए तथा बीएससी एनीमेशन व मल्टीमीडिया तथा एमटेक व एमसीए डिग्री पाठ्यक्रम पढ़ाये जाते है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय द्वारा फिजिक्स, मैथ, कैमिस्ट्री व इनवायरमेंट साइंस में एमएससी तथा एमए (जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन) के पाठ्यक्रम भी चल रहे है। विश्वविद्यालय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विभिन्न विषयों में पीएचडी भी करवाता है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय में कम्युनिटी काॅलेज भी चल रहा है। वाईएमसीए विश्वविद्यालय जर्मन प्रौद्योगिकी पर आधारित कार्यशालाओं के लिए पहचाना जाता है, जहां विद्यार्थियों को आज भी जर्मन मशीनरी पर कार्य का अनुभव मिलता है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय द्वारा औद्योगिक सहभागिता में नवीनतम प्रौद्योगिकी पर आधारित दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किये गये है। विश्वविद्यालय को एसोचैम द्वारा वर्ष 2014 में सर्वश्रेष्ठ नवोदित विश्वविद्यालय का पुरस्कार दिया गया था।
हाल ही में विश्वविद्यालय का चयन विश्व बैंक से सहायतार्थ तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (टीईक्यूआईपी-3) के अंतर्गत हुआ है तथा विश्वविद्यालय को सात करोड़ रुपये आवंटित हुए है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के अंतर्गत भी विश्वविद्यालय को 20 करोड़ रुपये आवंटित हुए है।
राज्य सरकार ने अधिसूचना के माध्यम से वाईएमसीए विश्वविद्यालय को शैक्षणिक वर्ष 2017-18 से जिला पलवल तथा फरीदाबाद में स्थित सभी (सरकारी तथा गैर सरकारी) बी.एड. और इंजीनियरिंग कालेजों पर अपनी शक्तियों के प्रयोग के लिए अधिकृत किया है। इस समय पलवल व फरीदाबाद के 18 इंजीनियरिंग संस्थान विश्वविद्यालय से संबद्ध है।

भूतपूर्व छात्रों की भूमिका
भारतीय एंटरप्राइजेज (एयरटेल) के उपाध्यक्ष व प्रबंध निदेशक राकेश भारती मित्तल तथा डेकिन इंडिया के प्रबंध निदेशक के. जे. जावा जैसे नाम वाईएमसीए विश्वविद्यालय के भूतपूर्व छात्रों में से है, जिनकी उद्योग जगत में अहम भूमिका है। वाईएमसीए विश्वविद्यालय के विद्यार्थी आज देश के एयर कंडिशनिंग उद्योग में शीर्ष कंपनियों में उच्च पदों पर कार्य कर रहे है। डेकिन इंडिया द्वारा विश्वविद्यालय में एयर कंडशिनिंग तकनीक पर आधारित एक सेंटर आफ एक्सीलेंस भी स्थापित किया है। भूतपूर्व छात्र संघ समय-समय पर विद्यार्थियों के मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए अपना योगदान देता है। मैटो रेल की आवाज शम्मी नारंग भी वाईएमसीए संस्थान का हिस्सा रहे है।

कम्युनिटी कॉलेज
विश्वविद्यालय के कम्युनिटी कालेज का उद्देश्य साधन से वंचित आर्थिक व शैक्षणिक रूप से कमजोर युवाओं का कौशल विकास कर उन्हें रोजगार के योग्य बनाना है। कालेज वर्ष 2013 में शुरू हुआ था और शैक्षणिक सत्र 2014-15 से वेल्डिंग एवं इलेक्ट्रिशियन में डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किये गये है। इस समय कम्युनिटी कालेज में 15 दिन के सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम से लेकर तीन वर्ष के डिग्री पाठ्यक्रम पहले से चल रहे है, जिनमें वेल्डिंग टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रीशियन तथा एयर कंडिशनिंग शामिल हैं।

विस्तार योजना
हरियाणा सरकार ने कैंपस विस्तार के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को लगभग 60 से 65 एकड़ भूमि आवंटन के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दी है, जिसके पहले चरण में विश्वविद्यालय को फरीदाबाद-गुरूग्राम मार्ग पर 18 एकड़ भूमि के आवंटन की स्वीकृति दे दी गई है।

एएनएस समाचार/सुभाष चंद गोयल/विद्या नन्द मिश्रा

 

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