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युवा वैज्ञानिक नेहा शर्मा ने जर्मनी में किया शोध पत्रो का वाचन

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जयपुर। जयपुर की युवा वैज्ञानिक नेहा शर्मा ने जर्मनी में नोबेल पुरस्कार विजेताओं के सामने अपना शोध कार्य प्रस्तुत किया। सुश्री नेहा शर्मा ने हाल ही में 69 वीं लिंडौ नोबेल पुरस्कार विजेता बैठक में भाग लिया और 42 नोबेल पुरस्कार विजेताओं के सामने अपना शोध कार्य प्रस्तुत किया। यह अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक बैठक 30 जून से 05 जुलाई 2019 के दौरान लिंडौ जर्मनी में आयोजित की गई हैं।

इसमे पूरे विश्व से विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले 42 नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों के साथ अनेकों विश्वस्तरीय वैज्ञानिक सम्मिलित हुए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाला सबसे बड़ा वैज्ञानिक सम्मेलन है जिसमें 42 नोबेल पुरस्कार विजेताओं के साथ अपना शोध कार्य साझा करने के लिए 88 देशों के 580 युवा वैज्ञानिकों का चयन किया गया है।

सुश्री नेहा शर्मा उन चुनिंदा युवा वैज्ञानिकों में से एक थीं जिन्होंने अपने शोध कार्य को 42 नोबेल पुरस्कार विजेताओं के साथ साझा किया और भविष्य के लिए संभावनाओं के अनुसार शोध की संभावित सुधार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। बैठक में 42 नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने भी चर्चा की थी कि कैसे उन्होंने यह महान पुरस्कार जीता है और किस प्रकार सभी युवा वैज्ञानिक अपने-अपने क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कार जीतने की ओर अग्रसर हो सकते है ।


कुमारी नेहा शर्मा का इस मीटिंग के लिए सबसे योग्य युवा वैज्ञानिक के रूप में चयन हुआ था। जिसनेें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहूचरणी प्रतिस्पर्धा को पार कर यह सम्मान प्राप्त किया है। नेहा शर्मा ने राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा आयोजित चयन प्रक्रिया में सफलता प्राप्त कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काउंसिल आफ नोबल लॉरेट द्वारा आयोजित चयन प्रक्रिया को भी सफलतापूर्वक पास किया। उसके बाद अंतिम रूप से स्वयं नोबेल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिकों ने नेहा शर्मा इस मीटिंग के लिए चयन किया।


सुश्री नेहा शर्मा को जर्मनी के लिंडौ नोबेल पुरस्कार विजेता बैठक में भाग लेने के लिए जर्मन रिसर्च फेलोशिप और युवा वैज्ञानिक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। कुमारी नेहा इस मीटिंग के दौरान नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक विजेताओं के समक्ष जैव-चिकित्सा उपकरणों और प्रत्यारोपणों के निर्माण में संभावित अनुप्रयोग के लिए प्लाज्मा उपचार द्वारा पॉलिमर-नैनो कम्पोजिट्स के जैव-अनुकूलन और जैव-रासायनिकता में परिवर्तन विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। जिसमें प्रयोगशाला स्तर पर उसके द्वारा बनाए गए एक ऐसे पदार्थ के बारे में चर्चा की जिनका उपयोग भविष्य में कृत्रिम त्वचा हड्डी व अन्य उपयोगी शारीरिक अंगों का निर्माण किया जा सकेगा।

इस मीटिंग के बाद नेहा शर्मा ने 6 जुलाई 2019 से आज 13 जुलाई 2019 तक जर्मन विश्वविद्यालय एवं जर्मन अनुसंधान संस्थानों की वैज्ञानिकों द्वारा विजिट की व जर्मन अनुसंधान संस्थानों के शोध कार्य को देखने का अवसर भी प्राप्त किया साथ ही उपयोगी रिसर्च नेटवर्किंग बनाए। इसके लिए नेहा को ड्यूश फोर्सचुंगसिमेन्शाफ्ट, डीएफजी की ओर से अलग से फेलोशिप प्राप्त हुयी।

इस संपूर्ण मीटिंग में नेहा को डोना स्ट्रिकलैंड और गेरार्ड मौरौ (नोबेल पुरस्कार 2018), एफ. डंकन, एम. हल्दाने और जे. माइकल म्यूसिलेट्ज (नोबेल पुरस्कार 2016), रेनर वीस (नोबल पुरस्कार 2015) जैसे 42 नोबेल पुरस्कार विजेताओं के साथ शोध विनिमय और नेटवर्किंग के लिए भरपूर अवसर प्राप्त हुया। कुमारी नेहा शर्मा यह शोध कार्य डॉ नरेंद्र कुमार अग्रवाल के साथ में कर रही है।

कुमारी नेहा शर्मा ने अपनी सफलता का श्रेय माता सुधा शर्मा, पिता महेंद्र कुमार शर्मा, प्रो प्रदीप, प्रो देवेंद्र, प्रो कृष्ण, प्रो के सी स्वामी, प्रो वाई के विजय एवं डॉ नरेंद्र कुमार अग्रवाल को देती है।

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